बयान से मुकरे जयंत मलैया; कहा- भाजपा सरकार ने खजाने में छोड़े 1 लाख 60 हजार करोड़
भाजपा सरकार के वित्त मंत्री रहे जयंत मलैया दो दिन पहले दिए अपने ही बयान से मुकर गए हैं। अब उन्होंने कहा है कि भाजपा सरकार में कभी भी ओवर ड्रॉफ्टिंग नहीं की गई है। राजस्व घाटे की बात कांग्रेस सरकार ही करती है। भाजपा सरकार ने सरकारी खजाने में 1 लाख 60 हजार करोड़ रुपए छोड़े हैं। जयंत मलैया नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री कमलनाथ के उस बयान का जवाब दे रहे थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा भी ये मान चुकी है कि प्रदेश का खजाना खाली है।
पूर्व वित्तमंत्री ने कहा कि कर्ज माफी अच्छी है, हम इसका स्वागत करते हैं। हमने भी किसानों के लिए बहुत किया है। पिछले एक साल में हमने अलग-अलग मदों में किसानों के खाते में 31 हजार करोड़ रुपए डाले हैं।
पूर्व वित्तमंत्री जयंत मलैया ने दो दिन पहले कहा था कि कांग्रेस ने 15 साल पहले हमें जिस हालत में मध्य प्रदेश का खजाना सौंपा था, हमने उन्हें वैसा ही लौटाया है। उन्होंने कहा था, 'मप्र पर राष्ट्रीयकृत बैंकों का 34 से 36 हजार करोड़ रुपए का कर्ज बाकी है। सब कुछ मिलाकर देखा जाए तो मप्र एक लाख 65 हजार करोड़ रुपए के कर्ज में है और करीब दो हजार करोड़ रुपए का ओवर ड्रॉफ्ट है।'
उन्होंने ये भी कहा था, 'किसानों की कर्जमाफी की गई तो प्रदेश आर्थिक संकट में फंस जाएगा। उन्होंने कहा था- इस कदम से प्रदेश के खजाने की स्थिति गंभीर हो जाएगी। वेतन के लाले पड़ जाएंगे। यदि कर्जमाफी होती है तो विकास के सारे काम बंद हो जाएंगे।'
बयान के बचाव में उतरे मलैया: अपने बयान के बचाव में उतरे पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार में मध्य प्रदेश की वित्तीय हालत बिलकुल ठीक है। इस साल सरकार ने 12 हजार 500 करोड़ का लोन लिया है। जहां तक किसानों की कर्जमाफी का सवाल है तो कांग्रेस की मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सरकारें राहुल गांधी के डर से किसानों के कर्ज माफ कर रही हैं। राहुल गांधी ने कहा था कि किसानों का कर्ज माफ नहीं हुआ तो 10 दिन में मुख्यमंत्री हटा दूंगा।
कमलनाथ ने सोमवार को मध्यप्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दोपहर 2:30 बजे उन्हें शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस के अलावा 10 अन्य दलों के नेता मौजूद रहे। वहीं, 4 पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, बाबूलाल गौर, दिग्विजय सिंह और कैलाश जोशी भी मंच पर मौजूद थे। कमलनाथ ने सीएम बनने के 2 घंटे बाद किसानों की कर्जमाफी की फाइल पर दस्तखत किए।
खुशी के साथ मुझे चिंता और बेचैनी भी: कमलनाथ
कमलनाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हमने किसानों का कर्ज माफ कर दिया। कन्या विवाह योजना की सहयोग राशि बढ़ा दी है। इसे 28 हजार से बढ़ाकर 51 हजार रुपए कर दिया गया है। हम चार गारमेंट पार्क बनाएंगे। जनता को स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार कैसे दे पाएंगे, इस पर तेजी से काम करना है। बहुत सारी योजनाएं ऐसी हैं, जिनका डिलिवरी सिस्टम खराब है और लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। खुशी एक तरफ है सीएम बनने की, लेकिन पहले दिन से ही बहुत काम है। मुझे बेचैनी और चिंता भी है कि हम किस तरह से मध्यप्रदेश के लोगों की आशाओं पर खरा उतरेंगे।
दो लाख रुपए तक का कर्ज माफ
कमलनाथ सरकार के पहले फैसले के तहत उन किसानों को कर्जमाफी का फायदा मिलेगा, जिन्होंने राज्य में स्थित सहकारी या राष्ट्रीयकृत बैंकों से शॉर्ट टर्म लोन लिया है। ऐसे किसानों का 31 मार्च 2018 की स्थिति के अनुसार 2 लाख रुपए तक का कर्ज माफ होगा। इसका फायदा राज्य के 21 लाख किसानों को मिल सकता है। वहीं, राज्य सरकार के खजाने पर 15 हजार करोड़ रुपए का भार आ सकता है। वैसे 30 सितंबर 2018 की स्थिति के मुताबिक राज्य के 40 लाख किसानों का 57 हजार करोड़ रुपए का कृषि ऋण बकाया है।
पूर्व वित्तमंत्री ने कहा कि कर्ज माफी अच्छी है, हम इसका स्वागत करते हैं। हमने भी किसानों के लिए बहुत किया है। पिछले एक साल में हमने अलग-अलग मदों में किसानों के खाते में 31 हजार करोड़ रुपए डाले हैं।
पूर्व वित्तमंत्री जयंत मलैया ने दो दिन पहले कहा था कि कांग्रेस ने 15 साल पहले हमें जिस हालत में मध्य प्रदेश का खजाना सौंपा था, हमने उन्हें वैसा ही लौटाया है। उन्होंने कहा था, 'मप्र पर राष्ट्रीयकृत बैंकों का 34 से 36 हजार करोड़ रुपए का कर्ज बाकी है। सब कुछ मिलाकर देखा जाए तो मप्र एक लाख 65 हजार करोड़ रुपए के कर्ज में है और करीब दो हजार करोड़ रुपए का ओवर ड्रॉफ्ट है।'
उन्होंने ये भी कहा था, 'किसानों की कर्जमाफी की गई तो प्रदेश आर्थिक संकट में फंस जाएगा। उन्होंने कहा था- इस कदम से प्रदेश के खजाने की स्थिति गंभीर हो जाएगी। वेतन के लाले पड़ जाएंगे। यदि कर्जमाफी होती है तो विकास के सारे काम बंद हो जाएंगे।'
बयान के बचाव में उतरे मलैया: अपने बयान के बचाव में उतरे पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार में मध्य प्रदेश की वित्तीय हालत बिलकुल ठीक है। इस साल सरकार ने 12 हजार 500 करोड़ का लोन लिया है। जहां तक किसानों की कर्जमाफी का सवाल है तो कांग्रेस की मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की सरकारें राहुल गांधी के डर से किसानों के कर्ज माफ कर रही हैं। राहुल गांधी ने कहा था कि किसानों का कर्ज माफ नहीं हुआ तो 10 दिन में मुख्यमंत्री हटा दूंगा।
कमलनाथ ने सोमवार को मध्यप्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दोपहर 2:30 बजे उन्हें शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस के अलावा 10 अन्य दलों के नेता मौजूद रहे। वहीं, 4 पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, बाबूलाल गौर, दिग्विजय सिंह और कैलाश जोशी भी मंच पर मौजूद थे। कमलनाथ ने सीएम बनने के 2 घंटे बाद किसानों की कर्जमाफी की फाइल पर दस्तखत किए।
खुशी के साथ मुझे चिंता और बेचैनी भी: कमलनाथ
कमलनाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हमने किसानों का कर्ज माफ कर दिया। कन्या विवाह योजना की सहयोग राशि बढ़ा दी है। इसे 28 हजार से बढ़ाकर 51 हजार रुपए कर दिया गया है। हम चार गारमेंट पार्क बनाएंगे। जनता को स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार कैसे दे पाएंगे, इस पर तेजी से काम करना है। बहुत सारी योजनाएं ऐसी हैं, जिनका डिलिवरी सिस्टम खराब है और लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। खुशी एक तरफ है सीएम बनने की, लेकिन पहले दिन से ही बहुत काम है। मुझे बेचैनी और चिंता भी है कि हम किस तरह से मध्यप्रदेश के लोगों की आशाओं पर खरा उतरेंगे।
दो लाख रुपए तक का कर्ज माफ
कमलनाथ सरकार के पहले फैसले के तहत उन किसानों को कर्जमाफी का फायदा मिलेगा, जिन्होंने राज्य में स्थित सहकारी या राष्ट्रीयकृत बैंकों से शॉर्ट टर्म लोन लिया है। ऐसे किसानों का 31 मार्च 2018 की स्थिति के अनुसार 2 लाख रुपए तक का कर्ज माफ होगा। इसका फायदा राज्य के 21 लाख किसानों को मिल सकता है। वहीं, राज्य सरकार के खजाने पर 15 हजार करोड़ रुपए का भार आ सकता है। वैसे 30 सितंबर 2018 की स्थिति के मुताबिक राज्य के 40 लाख किसानों का 57 हजार करोड़ रुपए का कृषि ऋण बकाया है।
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